लेखनी प्रतियोगिता -28-Nov-2022
#प्रतियोगिता
विषय :- मन की आवाज
कहीं बैठे किसी कोने में
मैं गुम थी अपने ही होने में
तभी दबी दबी सन्नाटों से
शोर मची किसी की बातो से
दौड़ पड़ी मैं उसके पीछे
पांव खुले, थे कंकड़ नीचे
दर्द हुआ ना तब पग के छालों से
देखा जो दृश्य झिलमिल आंखों से
खेल रही थी कोई गुड्डे गुड़ियों से
थी चेहरे पर मुस्कान खुशियों के
दो पग चलने पर कोई मेरा ध्यान घिचे
हाथों में चूड़ी माथे पर बिंदिया आंखें मिचे
पलक झपका और देखा लाल चुनर ओढ़े
खुशियों के बंधन में प्यार के रिश्तों को जोड़े
खिलखिला रही थी उस पल जो साथ अपनों के खड़े
कोई और नही , वो थी मेरी ही छवि दर्पण ये बोले
देख ये नजारा तब मेरा मन अचरज में डोले
धुन टूटी और उठ खड़ी हुई मैं अपनी आंखे खोले
सोच में पड़ गई मैं उस पल मौन आधरों में घोले
किसकी थी वह आवाज जिसके पीछे थे मेरे पग ये दौड़े
तब बैठ हकीकत को मैंने जब अपने सपनों के साथ तोले
थी वो मेरे मन की ही आवाज हौले से आके मेरा मन मुझसे ये बोले
मेरे *मन की आवाज* जो ले गई मुझे अपनी ही दुनिया में
जिसे मैं खो बैठी थी यहीं_कहीं सपनों की दुनिया में !!!
नाम:- कल्पनाओं की कवियत्री (PG)
स्वरचित रचना
Gunjan Kamal
05-Dec-2022 08:01 PM
शानदार प्रस्तुति 👌
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Pratikhya Priyadarshini
30-Nov-2022 09:23 PM
Bahut khoob 💐🙏
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राजेश बनारसी बाबू
29-Nov-2022 08:42 PM
शानदार, जबरदस्त, mind-blowing, जय माता दी..😮
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